बीमारी का बगैर दवाई भी इलाज़ है,मगर मौत का कोई इलाज़ नहीं दुनियावी हिसाब किताब है कोई दावा ए खुदाई नहीं लाल किताब है ज्योतिष निराली जो किस्मत सोई को जगा देती है फरमान दे के पक्का आखरी दो लफ्ज़ में जेहमत हटा देती है

Sunday, 9 September 2018

उन्नति, खुशहाली और मंगलकारी गणपति महोत्सव पर प्रभावशाली ज्योतिषीय उपाय

अंतर्गत लेख:




शास्त्रों के अनुसार हिंदु धर्म के किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्य का आरंभ गणपतिजी की पूजा अर्चना से ही प्रारम्भ होता है |
भगवान गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा गया है | गणेश जी उन्नति, खुशहाली और मंगलकारी देवता हैं। जीवन में समस्त प्रकार कि रिद्धि-सिद्धि एवं सुखो कि प्राप्ति एवं अपनी सम्स्त आध्यात्मिक-भौतिक इच्छाओं कि पूर्ति हेतु गणेश जी कि पूजा-अर्चना एवं आराधना अवश्य करनी चाहिये। 
हमारे शरीर में पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां और चार अंतःकरण हैं। इनके पीछे जो शक्तियां हैं उनको चैदह देवता कहते हैं। इन देवताओं के मूल प्रेरक भगवान श्री गणेश हैं। गणपतिजी के अलग-अलग नाम व अलग-अलग स्वरूप हैं,
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार  ग्रह पीडा दूर करने हेतु भगवान गणेश कि पूजा-अर्चना करने से समस्त ग्रहो के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं एवं शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं।
 मानव जीवन में अनेक प्रकार की वास्तु दोष और कुंडली की ग्रह जनित बाधायें आती रहती हैं जिनका समुचित निदान पाने के लिये अनेक प्रकार के उपाय करने के बाद भी यदि आपको सफलता नही मिली तो इस गणपति महोत्सव पर प्रत्येक ग्रह के लिये अधोलिखित ज्योतिषीय उपाय शास्त्रो मे बताये गये हैं |
यदि प्रथम भाव पीडित अर्थात शारीरिक समस्या है तो गणेशजी को दूर्वा जल से अभिषेक करें ओम् गं गणपतये नमः मंत्र के द्वारा |
यदि दूसरा भाव अर्थात धन की समस्या है तो गणेशजी को कमलगट्टे एवम् कमल के फूलो की माला चढाये |
यदि तीसरा भाव अर्थात पराक्रम मे कमी है तो गणेशजी को कत्थे को चंदन मे मिलाकर चढाये
यदि चतुर्थ भाव अर्थात पारिवारिक समस्या है तो मिश्री मिलाकर जल चढायें |
यदि पंचम भाव अर्थात संतान सम्बन्धी समस्या हो तो गाय का शुद्ध देशी घी चीनी मिलाकर गणेशजी को चढाये |
यदि छठा भाव अर्थात रोग की समस्या हो तो कुशा जल से गणेशजी को अभिषेक करे |
यदि सप्तम भाव अर्थात जीवन साथी से सम्बन्धित समस्या हो तो गणेशजी को गुलाब का फूल शहद मे डाल कर चढायें |
यदि अष्टम भाव अर्थात गुप्त धन से सम्बन्धित समस्या हो तो गंगाजल गणेशजी को चढाये |
यदि नवम भाव अर्थात भाग्य मे संघर्ष हो तो केशर युक्त पुष्प गणेशजी को चढाये |
यदि दशम भाव अर्थात व्यवसाय की समस्या हो तो 11 लड्डू गणेशजी को चढाये |
यदि एकादशी भाव अर्थात धनागम की समस्या हो तो 5 बदाम मिश्री के साथ गणेशजी को चढाये |
यदि व्यय भाव अर्थात खर्च की समस्या हो तो गणेशजी को १०८ दूर्वा दही मे मिलाकर चढाये |
भगवान गणेश हाथी के मुख एवं पुरुष शरीर युक्त होने से राहू व केतू के भी अधिपति देव हैं। गणेशजी का पूजन करने से राहू व केतू से संबंधित पीडा काफी जल्दी दूर होती हैं।
 प्रतिदिन भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित की जानी चाहिए।
गणेश महोत्सव पर   विशेषतौर दूर्वा चढ़ाकर उनका पूजन-अर्चन करने से  हमारे जीवन के समस्त कष्टों का निवारण शीघ्र ही हो जाता है |
श्रीगणेश को दूर्वा अर्पण करने का मंत्र
'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।' 
भगवान श्री गणेश का नवग्रहों से संबंध
भगवान गणेश सूर्य तेज के समान तेजस्वी हैं। उनका पूजन-अर्चन करने से सूर्य के प्रतिकूल प्रभाव का शमन होकर व्यक्ति के यश  तेज-मान-सम्मान, पितृसुख में वृद्धि होती हैं |
भगवान गणेश चंद्र के समान शांति एवं शीतलता के प्रतिक हैं। पूजन-अर्चन करने से चंद्र ग्रह अनुकूल होकर मानसिक शांति देते हैं  चंद्र माता का कारक ग्रह होने से  मातृसुख में वृद्धि होती हैं। 
भगवान गणेश मंगल के समान शिक्तिशाली एवं बलशाली हैं। पूजन-अर्चन करने से साहस, बल, पद और प्रतिष्ठा, नेतृत्व शक्ति , भातृ सुख   में वृद्धि होती हैं |
गणेशजी बुद्धि और विवेक के करक ग्रह  बुध  के अधिपति देव हैं।  विद्या-बुद्धि, वाकशक्ति और तर्कशक्ति  प्राप्ति के लिए गणेश जी की आराधना अत्यंत फलदायी  हैं।
भगवान गणेश बृहस्पति(गुरु) के समान उदार, ज्ञानी एवं बुद्धि कौशल में कुशल  हैं। गणेशजी का  पूजन-अर्चन करने से  व्यक्ति के धन- वैभव , सुखी वैवाहिक जीवन  में वृद्धि होती हैं एवं  आध्यात्मिक ज्ञान का विकास होता है  और गुरु से संबंधित पीडा दूर होती हैं |

भगवान गणेश धन, ऐश्वर्य एवं संतान प्रदान करने वाले शुक्र के अधिपति हैं। व्यक्ति को समस्त भौतिक सुख , सौन्दर्य में वृद्धि  होती हैं  शुक्र के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए गणेशजी की पूजा सर्वश्रेष्ठ हैं |
भगवान गणेश शिव के पुत्र हैं। भगवान शिव शनि के गुरु हैं। गणेशजी का पूजन करने से शनि से संबंधित पीडा दूर होती हैं।
 भगवान गणेश हाथी के मुख एवं पुरुष शरीर युक्त होने से राहू व केतू के भी अधिपति देव हैं। गणेशजी का पूजन करने से राहू व केतू से संबंधित पीडा दूर होती हैं।
इसलिये नवग्रह कि शांति मात्र भगवान गणेश के स्मरण से ही हो जाती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं हैं।
जन्म कुंडली में चाहें होई भी ग्रह अस्त हो या नीच हो अथवा पीडित हो तो भगवान गणेश कि आराधना से सभी ग्रहो के अशुभ प्रभाव दूर होता हैं एवं शुभ फलो कि प्राप्ति होती हैं।
उपरोक्त उपाय गणपति महोत्सव के समय करने से श्रीगणेश अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें सुखी जीवन और संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान करते है। 
सभी उपाय -- ओम् गं गणपतये नमः मंत्र के साथ करे |
श्री गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 13 सितंबर 2018 को उदित होकर 14.52.20 तक रहेगी फिर पंचमी लगेगी, अत: गुरुवार को गणेश स्थापना दिवस मनाया जाएगा।
इसके बाद 23 सितंबर 2018, रविवार को अनंत चतुर्दशी है, इस दिन गणेश विसर्जन किया जाएगा।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह : अमृत के चौघड़िया में : 6.04 से 7.41 तक
शुभ के चौघड़िया में : 9.18 से 10.55 तक
चल के चौघड़िया में : 14.09 चतुर्थी रहने तक 14.52.20 तक
12 सितंबर 2018, बुधवार के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिन चतुर्थी तिथि 16.45 बजे से लगेगी व चंद्र उदय का समय सुबह 8.34.30 पर होकर चंद्रास्त 20.42.29 तक रहेगा।
13 सितंबर, गुरुवार को चंद्रोदय 9.32.34 को उदय होकर चंद्रास्त 21.23.35 तक रहेगा। इस दिन दोपहर को पंचमी 14.52.21 से लगेगी।

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Friday, 31 August 2018

जन्माष्टमी कब है 2 सितंबर की या 3 सितंबर की ????

21-08-2018

मित्रो धर्मग्रंथो के अनुसार भगवान श्री कृष्णा का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि और बुधवार को हुआ था रोहिणी नक्षत्र में पर हर बार ऐसा होता है कई बार की हमको अष्टमी तिथि रात को नही मिल पाती और कई बार रोहिणी नक्षत्र नही हो पाता है इस साल भी 2 सितंबर को रविवार 8.48 रात तक सप्तमी तिथि है और उसको बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी और रविवार की रात को ही चंद्रमा भी रोहिणी नक्षत्र में उच्च राशि वर्षभ मे ही है
तिथि वार और नक्षत्र जो होने चाहिए  जन्माष्टमी  के लिए वो रविवार की रात्रि को ही है
इसलिए व्रत पूजन कृष्ण भगवान को झूला झुलाना यह रविवार को ही होगा
कृष्ण जनमोत्स्व रविवार को मनाया जाना ही सही है
3 सितंबर को रात को 7.20 से नवमी तिथि है और मृगशिरा नक्षत्र है इसमें कृष्णा भगवान का जन्म नही हुआ है इसलिए 3 सितंबर को कृष्णा जनमोत्स्व मानना शास्त्र सम्मत नही है
ऋषि व्यास नारद जी कहते है
सप्तमी
तिथि के साथ अगर अष्टमी तिथि भी लग जाय तो
ऐसे में उस दिन ही व्रत पूजन करना चाहिए
पर इसमे भी वैष्णव मत वाले लोग जैसे कि मथुरा वृंदावन उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र बिहार यहाँ पर यह लोग उदयकालीन अष्टमी तिथि को ग्रहण करते है रात को चाहे नवमी तिथि होअष्टमी हो या न हो इसलिए कैलेंडर में 3 सितंबर की जन्म  अष्टमी  लिखी  है
पर कृष्ण भगवान का जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी  तिथि को हुआ था
इसलिए श्री कृष्णा जनमोत्स्व रविवार को ही मनाना बिल्कुल सही है
2 सितंबर जन्माष्टमी  बिल्कुल सही है  रविवार को यह पर्व व्रत करना चाहिए जो सही भी है

Posted By Laxman Swatantra02:41

Monday, 23 July 2018

सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण इस वर्ष की गुरु पूर्णिमा यानि 27 जुलाई की देर रात को

अंतर्गत लेख:


इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण इस वर्ष की गुरु पूर्णिमा यानि 27 जुलाई की देर रात को घटित हो रहा है। ग्रहण का स्पर्श काल 27 जुलाई को रात 11.54 पर होगा। इसका समापन 28 जुलाई की सुबह 03.54 पर है। यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा में आरंभ होकर श्रवण नक्षत्र में समाप्त होगा। इस दौरान प्रीति योग और बालव करण होगा। 
चन्द्र ग्रहण पर क्या करें क्या न करें, जानिए सूतक का समय
सूर्य ग्रहण में सूतक का प्रभाव 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण में सूतक का प्रभाव 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है | सूतक लगने पर नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है इसलिए कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इस बार सदी का सबसे लंबा चन्द्र ग्रहण पड़ने जा रहा है। ग्रहण 27 जुलाई की रात 11 बजकर 54 मिनट से शुरू हो जाएगा जो 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 54 मिनट पर खत्म होगा। चंद्र ग्रहण पर सूतक का समय दोपहर 2 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य और चंद्र ग्रहण दिखाई देने पर ही सूतक मान्य होता है|  
चन्द्रग्रहण, किस राशि पर कैसा होगा असर, 
मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण श्रेष्ठ, 
वृषभ, कर्क, कन्या और धनु राशि के लिए ग्रहण मध्यम फलदायी तथा
मिथुन, तुला, मकर व कुंभ राशि वालों के लिए अशुभ रहेगा।

मेष- इस राशि वालों के बिगड़े काम बनेंगे। आर्थिक समस्या का समाधान होगा। उन्नति के अवसर आएंगे।
वृषभ- इस राशि वालों को मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। नौकरीपेशा संभलकर चलें। व्यापारी वर्ग के लिए समय ठीक रहेगा।
मिथुन- सावधानी रखकर चलें। स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। पारिवारिक खर्च अधिक होगा। धनलाभ के योग कम हैं।
कर्क- मिला-जुला समय होने से मन कुछ अशांत रहेगा, फिर भी घबराने वाली बात नहीं है। व्यापार-व्यवसाय पूर्ववत ही रहेगा।
सिंह- उन्नति के अवसर मिलने से प्रसन्नता रहेगी। बाहर गांव की यात्रा के योग बनेंगे, जो लाभदायी होंगे।
कन्या- समय का सदुपयोग जितना कर सको, करें। परिणाम अनुकूल ही रहेंगे। नौकरीपेशा व्यस्त रहेंगे। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
तुला- सावधानी रखना आपके लिए हितकर रहेगा। पारिवारिक विवाद से बचकर चलें। शत्रु वर्ग प्रभावी हो सकते हैं।
वृश्चिक- समय अनुकूल होने से लाभजनक स्थिति रहेगी। व्यापारी वर्ग भी सुखद वातावरण पाएंगे। स्त्री पक्ष से लाभ होगा।
धनु- समय का ध्यान रखकर कार्य करें। आर्थिक मामलों में संभलकर चलें। नौकरीपेशा व्यस्तता पाएंगे। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
मकर- सावधानी रखकर कार्य करें। नौकरीपेशाओं के लिए सतर्कता रखना होगी। शत्रुपक्ष प्रभावी हो सकते हैं।
कुंभ- सोच-विचारकर कार्य करें। पारिवारिक विवाद से बचकर चलें। स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। खर्च अधिक होगा।
मीन- सुखद वातावरण रहेगा जिससे कि मन प्रसन्न रहेगा। सभी इच्छित कार्यों में सफलता मिलेगी। शत्रु प्रभावहीन होंगे।
ग्रहण पर क्या न करें-
*ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
* सूतक में सिलाई कढ़ाई का कोई भी कार्य न करें।
*सूतक में ना ही भोजन करें।
* चंद्र ग्रहण के दौरान शौचालय नहीं जाना चाहिए।
ग्रहण पर क्या करें-
* ग्रहण पर जप करें और अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो ऊं चन्द्राय नम: का जप करें।
* ग्रहण के दौरान तुलसी पत्ता नहीं तोडना चाहिए इसलिए सूतक से पहले ही तोड़ लें और दूध और दही में भी तुलसी पत्ता डाल दे |
* अगर आप किसी तीर्थयात्रा पर है तो वहां स्नान कर जप और दान करें |
* ग्रहण के बाद हवन करें और पूरे घर को गंगाजल से छिड़काव करें इससे आपको लाभ और रोग से छुटकारा मिलेगा | 
उपाय- जिनके लिए ग्रहण अशुभ फलदायी है, वे अपनी राशिनुसार दान दें। मिश्रित अनाज पक्षियों को खिलाएं।

Posted By Laxman Swatantra12:34

Friday, 16 March 2018

शनिश्चरी अमावस्या इस खास योग में शनिदेव की पूजा करेंगे तो बनेंगे बिगड़े काम

अंतर्गत लेख:



शायद आपको आज के दिन का महत्व न पता हो। आज अमावस्या है और शनिवार का दिन है। जिसके कारण आज की शनि अमावस्या का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। शनैश्चरी अमावस्या है। संभव है कि शनैश्चरी अमावस्या के मायने कितने खास हैं, ये बात सभी जानते होंगे । शनिश्चरी अमावस्या योग में शनिदेव  की विधि-विधानपूर्वक उपासना से सुख, समृद्धि, संपत्ति, शांति, संतान और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है।
इस दिन शनिदेव की पूजा करने से बिगड़े हुए कार्य भी बनने लगते हैं। शनि की साढ़े साती से प्रभावित चल रहे जातकों के लिए इस दिन शनि देव की आराधना विशेष लाभकारी होगी। इस दिन मन से की गई शनि पूजा विशेष लाभ देगी व जीवन में शनिकृपा भी बनी रहेगी।
 शनि अमावस्या के दिन पर क्या करें खास
शनि अमावस्या के दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व ही गंगा, यमुना अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर पर ही साधारण पानी में गंगा या यमुना का जल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
इसके बाद अपने इष्टदेव, गुरुजन, माता-पिता, श्री गणेश, भगवान शिव और सूर्यदेव की आराधना करके सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। शनैश्चरी अमावस्या को अपने पितरों के निमित्त भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल मिश्रित जल अर्पण करना चाहिए।
ऐसा करने से पितृ दोष दूर होकर पितरों की कृपा जीवनभर मिलती रहती है। पीपल पर प्रातः अथवा शाम को जल चढ़ाना भी अच्छा उपाय है। शनि देव की मूर्ति पर उनके चरणों की ओर देखते हुए सरसों का तेल, काले तिल, लोहे की कील या सिक्का, काले वस्त्र का टुकड़ा, काजल आदि अर्पित करते हुए शनि देव से सभी दुःख और कष्ट दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिए।
ऐसा करने से शनि देव जल्द प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी करते हैं। 35 से 42 वर्ष की आयु सीमा वाले जातकों तथा शनि के अशुभ प्रभाव से पीड़ित जातकों को इस शनैश्चरी अमावस्या पर शनिदेव की उपासना करते हुए श्रद्धानुसार लोहा, भैंस, काली उड़द या मसूर की दाल, सरसों का तेल, काले रंग की वस्तुएं जैसे छाता, जूते, कम्बल, कपड़ा आदि का दान शाम के समय किसी वृद्ध एवं निर्धन व्यक्ति को करना अत्यंत ही शुभ परिणाम देने वाला सरल व प्रभावकारी उपाय है।
जिन जातकों की कुंडली में शनि निर्बल राशिगत हो, उन्हें इसके कारण लकवा, कमर दर्द, चोट लगने से दर्द एवं अंग भंग, पेट रोग, कुष्ठ, दमा, नेत्र रोग, वात  रोग आदि होने की संभावना रहती है।
इसलिए इन रोगों से बचाव के लिए जातकों को शनि ग्रह से संबंधित मंत्र ओउम शं शनैश्चराय नमःका प्रतिदिन ग्यारह माला जप करना चाहिए। इसके अलावा शनि स्तोत्र, शनि स्तवन, शनि पाताल क्रिया, महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र, हनुमान उपासना आदि का विधि पूर्वक पाठ करना भी बहुत उपयोगी  माना गया है।
जिन जातकों की राशि में शनि नीच या कमजोर है, उन्हें इस दिन शनि पूजन जरूर करना चाहिए। पूजा के बाद शनि से संबंधित वस्तुएं दान करना लाभकारी होता है व शनिदेव की कृपा बनी रहती है। इस अमावस्या पर किया गया शनि पूजन उपासकों को विशेष लाभ पहुंचाता है। इससे ग्रहदोष भी शांत होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।


Posted By Laxman Swatantra09:03

Thursday, 1 March 2018

पंचांग मार्च २०१८


०१बृहस्पतिवार चौमासी चौदस, छोटी होली, होलिका दहन, वसन्त पूर्णिमा, दोल पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास, अष्टाह्निका विधान पूर्ण, फाल्गुन पूर्णिमा, लक्ष्मी जयन्ती, चैतन्य महाप्रभु जयन्ती, मासी मागम
०२ शुक्रवार होली, चैत्र प्रारम्भ *उत्तर, अट्टुकल पोंगल
०३ शनिवार भाई दूज, भ्रातृ द्वितीया
०४ रविवार शिवाजी जयन्ती
०५ सोमवार संकष्टी चतुर्थी
०६ मंगलवार रंग पञ्चमी
०८ बृहस्पतिवार शीतला सप्तमी
०९ शुक्रवार बसोड़ा, शीतला अष्टमी, कालाष्टमी, वर्षी तप आरम्भ
१३ मंगलवार पापमोचिनी एकादशी
१४ बुधवार प्रदोष व्रत, मीन संक्रान्ति, कारादाइयन नौम्बू
१५ बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि
१७ शनिवार चैत्र अमावस्या, दर्श अमावस्या
१८ रविवार चन्द्र दर्शन, चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, युगादी
१९ सोमवार झूलेलाल जयन्ती
२० मंगलवार गौरीपूजा, गणगौर, मत्स्य जयन्ती, वसन्त सम्पात
२१ बुधवार विनायक चतुर्थी, लक्ष्मी पञ्चमी
२२ बृहस्पतिवार स्कन्द षष्ठी
२३ शुक्रवार यमुना छठ, रोहिणी व्रत
२४ शनिवार नवपद ओली प्रारम्भ, मासिक दुर्गाष्टमी
२५ रविवार राम नवमी, महातारा जयन्ती
२७ मंगलवार कामदा एकादशी
२८ बुधवार वामन द्वादशी
२९ बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत, महावीर स्वामी जयन्ती
३० शुक्रवार गुड फ्राइडे, हजरत अली का जन्मदिन
३१ शनिवार हनुमान जयन्ती, चैत्र पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास, नवपद ओली पूर्ण, पैन्गुनी उथिरम

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Tuesday, 30 January 2018

खग्रास चन्द्रग्रहण – 31 जनवरी 2018

अंतर्गत लेख:

खग्रास चन्द्रग्रहण – 31 जनवरी 2018

(भूभाग में ग्रहण समय – शाम 5.17 से रात्रि 8.42 तक) (पूरे भारत में दिखेगा, नियम पालनीय ।)
चन्द्रग्रहण बेध (सूतक) का समय
सुबह 8.17 तक भोजन कर लें । बूढ़े, बच्चे, रोगी और गर्भवती महिला आवश्यकतानुसार दोपहर 11.30 बजे तक भोजन कर सकते हैं । रात्रि 8.42 पर ग्रहण समाप्त होने के बाद पहने हुए वस्त्रोंसहित स्नान और चन्द्रदर्शन करके भोजन आदि कर सकते हैं ।

ग्रहण पुण्यकाल
जिन शहरों में शाम 5.17 के बाद चन्द्रोदय है वहाँ चन्द्रोदय से ग्रहण समाप्ति (रात्रि 8.42) तक पुण्यकाल है । जैसे अमदावाद का चन्द्रोदय शाम 6.21 से ग्रहण समाप्त रात्रि 8.42 तक पुण्यकाल है ।
¬शहरों का स्थान और चन्द्रोदय
नीचे कुछ मुख्य शहरों का चन्द्रोदय दिया जा रहा है उसके अनुसार अपने-अपने शहरों का ग्रहण के पुण्यकाल का जानकर अवश्य लाभ लें ।
इलाहाबाद (शाम 5.40), अमृतसर (शाम 5.58), बैंगलुरू (शाम 6.16), भोपाल (शाम 6.02), चंडीगढ़ (शाम 5.52), चेन्नई (शाम 6.04), कटक (शाम 5.32), देहरादून (शाम 5.47), दिल्ली (शाम 5.54), गया (शाम 5.27), हरिद्वार (शाम 5.48), जालंधर (शाम 5.56), कोलकत्ता (शाम 5.17), लखनऊ (शाम 5.41), मुजफ्फरपुर (शाम 5.23), नागपुर (शाम 5.58), नासिक (शाम 6.22), पटना (शाम 5.26), पुणे (शाम 6.23), राँची (शाम 5.28), उदयपुर (शाम 6.15), उज्जैन (शाम 6.09), वड़ोदरा (शाम 6.21), कानपुर (शाम 5.44)
(इन दिये गये स्थानों के अतिरिक्तवाले अधिकांश स्थानों में पुण्यकाल का समय लगभग शाम 5.17 से रात्रि 8.42 के बीच समझें ।)

ग्रहण के समय पालनीय
(1) ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए ।
(2) सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना । यदि गंगा-जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना फलदायी होता है ।
(3) ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है ।
(4) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है

Posted By Laxman Swatantra06:41

Wednesday, 3 January 2018

पंचांग 2018 – हिंदी कैलेंडर 2018

अंतर्गत लेख:

पंचांग 2018 – हिंदी कैलेंडर 2018

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जनवरी 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

2 जनवरी 2018 – मंगलवार, पौष पूर्णिमा व्रत

5 जनवरी 2018 – शुक्रवार, संकष्टी चतुर्थी

12 जनवरी 2018 – शुक्रवार, षटतिला एकादशी

14 जनवरी 2018 – रविवार, मकर संक्रांति , पोंगल , उत्तरायण , प्रदोष व्रत (कृष्ण)

15 जनवरी 2018 – सोमवार, मासिक शिवरात्रि

16 जनवरी 2018 – मंगलवार, पौष अमावस्या

22 जनवरी 2018 – सोमवार, सरस्वती पूजा , बसंत पंचमी

28 जनवरी 2018 – रविवार, जया एकादशी

29 जनवरी 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

31 जनवरी 2018 – बुधवार, माघ पूर्णिमा व्रत

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फरवरी 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

3 फरवरी 2018 – शनिवार, संकष्टी चतुर्थी

11 फरवरी 2018 – रविवार, विजया एकादशी

13 फरवरी 2018 – मंगलवार, कुम्भ संक्रांति , मासिक शिवरात्रि , महाशिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)

15 फरवरी 2018 – गुरुवार, माघ अमावस्या

26 फरवरी 2018 – सोमवार, आमलकी एकादशी

27 फरवरी 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

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मार्च 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

1 मार्च 2018 – गुरुवार, होलिका दहन , फाल्गुन पूर्णिमा व्रत

2 मार्च 2018 – शुक्रवार, होली

5 मार्च 2018 – सोमवार, संकष्टी चतुर्थी

13 मार्च 2018 – मंगलवार, पापमोचिनी एकादशी

14 मार्च 2018 – बुधवार, मीन संक्रांति , प्रदोष व्रत (कृष्ण)

15 मार्च 2018 – गुरुवार, मासिक शिवरात्रि

17 मार्च 2018 – शनिवार, फाल्गुन अमावस्या

18 मार्च 2018 – रविवार, चैत्र नवरात्रि , उगाडी , गुड़ी पड़वा , घटस्थापना

19 मार्च 2018 – सोमवार, चेटी चंड

25 मार्च 2018 – रविवार, राम नवमी

26 मार्च 2018 – सोमवार, चैत्र नवरात्रि पारणा

27 मार्च 2018 – मंगलवार, कामदा एकादशी

29 मार्च 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

31 मार्च 2018 – शनिवार, हनुमान जयंती , चैत्र पूर्णिमा व्रत

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अप्रैल 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

3 अप्रैल 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी

12 अप्रैल 2018 – गुरुवार, बरूथिनी एकादशी

13 अप्रैल 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)

14 अप्रैल 2018 – शनिवार, मासिक शिवरात्रि , मेष संक्रांति

16 अप्रैल 2018 – सोमवार, चैत्र अमावस्या

18 अप्रैल 2018 – बुधवार, अक्षय तृतीया

26 अप्रैल 2018 – गुरुवार, मोहिनी एकादशी

27 अप्रैल 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

30 अप्रैल 2018 – सोमवार, वैशाख पूर्णिमा व्रत

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मई 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

3 मई 2018 – गुरुवार, संकष्टी चतुर्थी

11 मई 2018 – शुक्रवार, अपरा एकादशी

13 मई 2018 – रविवार, मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)

15 मई 2018 – मंगलवार, वृष संक्रांति , वैशाख अमावस्या

25 मई 2018 – शुक्रवार, पद्मिनी एकादशी

26 मई 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

29 मई 2018 – मंगलवार, पूर्णिमा व्रत

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जून 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

2 जून 2018 – शनिवार, संकष्टी चतुर्थी

10 जून 2018 – रविवार, परम एकादशी

11 जून 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)

12 जून 2018 – मंगलवार, मासिक शिवरात्रि

13 जून 2018 – बुधवार, अमावस्या

15 जून 2018 – शुक्रवार, मिथुन संक्रांति

23 जून 2018 – शनिवार, निर्जला एकादशी

25 जून 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

28 जून 2018 – गुरुवार, ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत

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जुलाई 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

1 जुलाई 2018 – रविवार, संकष्टी चतुर्थी

9 जुलाई 2018 – सोमवार, योगिनी एकादशी

10 जुलाई 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)

11 जुलाई 2018 – बुधवार, मासिक शिवरात्रि

13 जुलाई 2018 – शुक्रवार, ज्येष्ठ अमावस्या

14 जुलाई 2018 – शनिवार, जगन्नाथ रथ यात्रा

16 जुलाई 2018 – सोमवार, कर्क संक्रांति

23 जुलाई 2018 – सोमवार, अषाढ़ी एकादशी , देवशयनी एकादशी

24 जुलाई 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

27 जुलाई 2018 – शुक्रवार, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत , गुरु-पूर्णिमा

31 जुलाई 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी

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अगस्त 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

7 अगस्त 2018 – मंगलवार, कामिका एकादशी

9 अगस्त 2018 – गुरुवार, मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)

11 अगस्त 2018 – शनिवार, आषाढ़ अमावस्या

13 अगस्त 2018 – सोमवार, हरियाली तीज

15 अगस्त 2018 – बुधवार, नाग पंचमी

17 अगस्त 2018 – शुक्रवार, सिंह संक्रांति

21 अगस्त 2018 – मंगलवार, श्रावण पुत्रदा एकादशी

23 अगस्त 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

25 अगस्त 2018 – शनिवार, ओणम/थिरुवोणम

26 अगस्त 2018 – रविवार, श्रावण पूर्णिमा व्रत , रक्षा बंधन

29 अगस्त 2018 – बुधवार, कजरी तीज

30 अगस्त 2018 – गुरुवार, संकष्टी चतुर्थी

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सितंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

2 सितंबर 2018 – रविवार, जन्माष्टमी

6 सितंबर 2018 – गुरुवार, अजा एकादशी

7 सितंबर 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)

8 सितंबर 2018 – शनिवार, मासिक शिवरात्रि

9 सितंबर 2018 – रविवार, श्रावण अमावस्या

12 सितंबर 2018 – बुधवार, हरतालिका तीज

13 सितंबर 2018 – गुरुवार, गणेश चतुर्थी

17 सितंबर 2018 – सोमवार, कन्या संक्रांति

20 सितंबर 2018 – गुरुवार, परिवर्तिनीएकादशी

22 सितंबर 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

23 सितंबर 2018 – रविवार, अनंत चतुर्दशी

25 सितंबर 2018 – मंगलवार, भाद्रपद पूर्णिमा व्रत

28 सितंबर 2018 – शुक्रवार, संकष्टी चतुर्थी

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अक्टूबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

5 अक्टूबर 2018 – शुक्रवार, इन्दिरा एकादशी

6 अक्टूबर 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)

7 अक्टूबर 2018 – रविवार, मासिक शिवरात्रि

9 अक्टूबर 2018 – मंगलवार, भाद्रपद अमावस्या

10 अक्टूबर 2018 – बुधवार, शरद नवरात्रि , घटस्थापना

15 अक्टूबर 2018 – सोमवार, दुर्गा पूजा की तिथियाँ , कल्परम्भ

16 अक्टूबर 2018 – मंगलवार, नवपत्रिका पूजा

17 अक्टूबर 2018 – बुधवार, दुर्गा महा अष्टमी पूजा , तुला संक्रांति , दुर्गा महा नवमी पूजा

18 अक्टूबर 2018 – गुरुवार, शरद नवरात्रि पारणा

19 अक्टूबर 2018 – शुक्रवार, दशहरा , दुर्गा विसर्जन

20 अक्टूबर 2018 – शनिवार, पापांकुशा एकादशी

22 अक्टूबर 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

24 अक्टूबर 2018 – बुधवार, अश्विन पूर्णिमा व्रत

27 अक्टूबर 2018 – शनिवार, करवा चौथ , संकष्टी चतुर्थी

नवंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

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3 नवंबर 2018 – शनिवार, रमा एकादशी

5 नवंबर 2018 – सोमवार, मासिक शिवरात्रि , धनतेरस , दिवाली पूजा की तिथियाँ , प्रदोष व्रत (कृष्ण)

6 नवंबर 2018 – मंगलवार, नरक चतुर्दशी

7 नवंबर 2018 – बुधवार, दिवाली , अश्विन अमावस्या

8 नवंबर 2018 – गुरुवार, गोवर्धन पूजा

9 नवंबर 2018 – शुक्रवार, भाई दूज

16 नवंबर 2018 – शुक्रवार, वृश्चिक संक्रांति

19 नवंबर 2018 – सोमवार, देवुत्थान एकादशी

20 नवंबर 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

23 नवंबर 2018 – शुक्रवार, कार्तिक पूर्णिमा व्रत

26 नवंबर 2018 – सोमवार, संकष्टी चतुर्थी

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दिसंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि

3 दिसंबर 2018 – सोमवार, उत्पन्ना एकादशी

4 दिसंबर 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)

5 दिसंबर 2018 – बुधवार, मासिक शिवरात्रि

7 दिसंबर 2018 – शुक्रवार, कार्तिक अमावस्या

16 दिसंबर 2018 – रविवार, धनु संक्रांति

19 दिसंबर 2018 – बुधवार, मोक्षदा एकादशी

20 दिसंबर 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)

22 दिसंबर 2018 – शनिवार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत

25 दिसंबर 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी

Posted By Laxman Swatantra07:04

Tuesday, 17 October 2017

दीपावली के मुहूर्त विशेष महत्व रखते है.


इस वर्ष 19 अक्तूबर, 2017 के दिन दिवाली मनाई जाएगी. दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन शुभ समय मुहूर्त्त समय पर ही किया जाना चाहिए. पूजा को सांयकाल अथवा अर्द्धरात्रि को अपने शहर व स्थान के मुहुर्त्त के अनुसार ही करना चाहिए. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है.19 अक्टूबर 2017, बृहस्पतिवार के दिन दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में 17:48 से 20:22 तक प्रदोष काल रहेगा. इसे प्रदोष काल का समय कहा जाता है. प्रदोष काल समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है.
वर्ष 2017 में कार्तिक माह की अमावस्या 19 अक्टूबर 2017, वीरवार, रात्रि 00:13* से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर 2017, शुक्रवार, रात्रि 00:41 पर समाप्त होगी।
वर्ष 2017 में दिवाली 19 अक्टूबर, वीरवार को मनाई जाएगी।
प्रदोष काल मुहूर्त शुभ समय
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त = 19:11 से 20:16
मुहूर्त की अवधि = 1 घंटा 5 मिनट
प्रदोष काल = 17:43 से 20:16
वृषभ काल = 19:11 से 21:06
महानिशिता काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त = 23:40 से 24:31+ (20 अक्टूबर 2017 को 00:31) *(स्थिर लग्न के बिना)
मुहूर्त की अवधि = 0 घंटा 51 मिनट
महानिशिता काल = 23:40 से 24:31+ (20 अक्टूबर 2017 को 00:31)
सिंह काल = 25:41+ (20 अक्टूबर 2017 को 01:41) से 27:59+ (20 अक्टूबर 2017 को 03:59)
चौघड़िया पूजा मुहूर्त
दिवाली लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त :
प्रातःकाल मुहूर्त (शुभ) = 06:28 से 07:53
प्रातःकाल मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) = 10:41 से 14:55
सायंकाल मुहूर्त (अमृत, चर) = 16:19 से 20:55

रात्रि मुहूर्त (लाभ) = 24:06+ (20 अक्टूबर 2017 को 00:06) से 24:41+ (20 अक्टूबर 2017 को 00:41)

Posted By Laxman Swatantra16:05

 
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