बीमारी का बगैर दवाई भी इलाज़ है,मगर मौत का कोई इलाज़ नहीं दुनियावी हिसाब किताब है कोई दावा ए खुदाई नहीं लाल किताब है ज्योतिष निराली जो किस्मत सोई को जगा देती है फरमान दे के पक्का आखरी दो लफ्ज़ में जेहमत हटा देती है

Wednesday, 6 October 2021

नवरात्रि में अखंड दीपक / ज्योत जलाने का विशेष महत्‍व - लाभ, नियम, मंत्र और शुभ मुहूर्त

अंतर्गत लेख:


 



नवरात्रि में अखंड दीपक / ज्योत जलाने का विशेष  महत्‍व  - लाभ, नियम, मंत्र और शुभ मुहूर्त
सनातन धर्म में  कोई भी पूजा हो या किसी समारोह का शुभारंभ। समस्त शुभ कार्यों का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन से होता है।ऐसी  मान्यता है कि अखंड दीप जलाकर पूजा करने से बहुत पुण्य की  प्राप्ति होती है।
 
दीप प्रकाश का प्रतीक  है और प्रकाश ज्ञान का। परमात्मा से हमें संपूर्ण ज्ञान मिले इसीलिए दीप प्रज्वलन करने की परंपरा है।
 = नवरात्रि के दौरान 9 दिन तक दीपक को जलाए रखना अखंड ज्योति कहलाता है। =
 
नवरात्रि में अखंड ज्योत का महत्व?
 
नवरात्रि के दौरान देवी माता   को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु कलश स्थापना, अंखड ज्योति, माता की चौकी आदि तरह के पूजन-अर्चन करते हैं। जैसे अंधेरे घर में दीपक की लौ रोशनी करती है, वैसे ही देवी  माता के नाम का ये दीपक हमारी जीवन के अंधकार को दूर करता है. |
 
 
अखंड ज्योत में एक ऐसी पॉजिटिव एनर्जी होती है, जो शत्रुओं की बुरी नजर से आपकी रक्षा करती है| मान्यता है कि नवरात्रि में दीपक जलाए रखने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन संकल्प करते हुए अखंड दीपक को जलाना चाहिए और नियमानुसार उसका सरंक्षण करना चाहिए।    
 
= अखंड ज्योति जलाने के फायदे =
 
A. अंखड ज्योति जलाने से घर और घर के लोगों पर हमेशा से मां की कृपा बनी रहती हैं. नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से पूजा स्थल पर कभी भी अनाप-शनाप चीजों का साया नहीं पड़ता है.
 
B. शुद्ध घी की ज्योति जलाने से घर में सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है. इस वजह से घर में हो रहे लड़ाई झगड़े और बीमारियों में कमी आती है.
 
C. नवरात्रि के दौरान विद्यार्थियों को अखंड ज्योति जलानी चाहिए. इससे उनकी शिक्षा बेहतर होगी और दिमाग पर सकारात्मक असर होगा. वो रोज अखंड ज्योति में घी डालें और नियमित तौर पर पूजा करें तो उनकी बुद्धि पर भी सकारात्मक असर होगा.
 
D. सरसों के तेल की अखंड ज्योति जलाने से देवी खुश होती हैं और तुरंत सभी काम बनने लगते हैं. ऐसा करने से पितृ भी शांत रहते हैं और घर में समृद्धि आती है.
 
E. अंखड दीप जलाना स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है क्योंकि घी और कपूर की महक से इंसान की श्वास और नर्वस सिस्टम बढ़िया रहता है.
 
F. अगर आप शनि का कुप्रभाव से बचना चाहते है तो अपने घर में अखंड ज्योति जरुर जलाएं. माता की कृपा से शनिदेव घर के लोगों पर अपनी टेढ़ी दृष्टि हटा लेते है और घर वालों के बिगड़े काम बनने लगते हैं. अगर घर में तिल के तेल की ज्योति जले तो यह ज्यादा प्रभावी होता है.
 
== नवरात्रि में अखंड ज्योति/ दीपक  जलाने के नियम ==
 
1. नवरात्रि में सबसे पहले अखंड ज्योति जलाने के लिए संकल्प लिया जाता है। जिसमें अखंड ज्योति नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक जलती है।
 
2. सबसे पहले जहां पर आपने माता की प्रतिमा स्थापित की है उसके सामने अष्टदल कमल बनाएं। यह आप कुमकुम और हल्दी या फिर रगोंली और चावलों को पीला करके भी बना सकते हैं।
 
3. तत्पश्चात  आप एक तांबे का दीपक लें। अगर आपके पास तांबे का दीपक नहीं है तो आप मिट्टी का दीपक भी लें सकते हैं।
 
4. तत्पश्चात  अष्टदल कमल के ऊपर बाएं तरफ दीपक को रखें और उसमें तिल का या सरसों का तेल डालें। जब भी अखंड ज्‍योति जलाएं, ये बात ध्यान रखें की दीपक सीधे जमीन पर न रखें। दीपक को मिट्टी की वेदी, पट्टे या किसी कलश के ऊपर रखकर जलाएं।
 
5. अखंड ज्योति के लिए  कलावे (मौली / रक्षा धागे )   की  प्रयोग करें।   कारण किसी भी शुभ काम कलावे का प्रयोग किया जाता है और कलावा काफी समय तक जलता रहता है , रुई का प्रयोग भी किया जा सकता है   ।
 
6. तत्पश्चात  बाती को दीपक में रखकर मां दूर्गा का आह्वाहन करके जला दें और मां दुर्गा / दीप के मंत्रों   का जाप करें।
 
= गणपति जी और शिवजी को भी पूजें =
 
अखंड ज्योति जलाने से पहले गणपति जी और भगवान शिव की पूजा जरूर करें। इसके बाद देवी दुर्गा की अराधना करें।
 
== दीप दर्शन शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥ दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥ ==
 
== माँ भगवती की आराधना का मंत्र ==                  
 
= "ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।" =
 
7.  तत्पश्चात   कलश की तरह ही अखंड ज्याति का पूजन करें और अष्टदल कमल पर फूलों को चढ़ाएं। अष्टदल कमल के चारों तरफ फूलों को चढ़ाना काफी शुभ रहता है।
 
8.फूल चढ़ाने के बाद दीपक के चारो और कुमकुम लगाएं और दीपक का पूजन करें।
 
9. जिस घर में भी अखंड ज्योत जलाई जाती है उस घर को न तो अकेला छोड़ा जाता है न ही बंद करके कहीं जाना चाहिए।
 
10. यदि आपको यह लग रहा है कि आपकी अखंड ज्योति बुझने वाली है तो पहले एक छोटे से दीपक को अखंड ज्योति से जला लें और उसके बाद अपनी अखंड ज्योति के दीपक को ठीक कर लें। इसके बाद अपनी अखंड ज्योति को जला लें। इस प्रकार से यदि आपको दीपक बुझ भी जाता है तो आपको अखंड ज्योति बुझने का दोष नही लगेगा।
 
= अगर दीपक बुझ जाता है तो तुरंत जला देना चाहिए और भगवान से भूल-चूक की क्षमायाचना करनी चाहिए। =
 
मान्यता अनुसार देवी जी को हमेशा तिल के तेल का ही दीपक जलाना चाहिए, साथ में गाय के घी का भी जलाना चाहिए, दाऐ तरफ घी का और बांऐ तरफ तिल के तेल का दीपक रखना चाहिए! देवी कृपा से अपार आध्यात्मिक और शारिरिक शक्ति प्राप्त होती है। अगर घर में नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है तो वहां हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। दीपक के धुएं से वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं।
= कलश स्‍थापना की तिथि और शुभ मुहूर्त =
 
कलश स्‍थापना की तिथि: 7 OCT. 2021.
 
कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त:  7 अक्टूबर 2021  -  सुबह  9.33 से से 11.31 बजे दोपहर 3.33 से शाम 5.05 के बीच भी घट स्थापना की जा सकेगी.
 
इसके अतिरिक्त दिन के अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना सबसे बढ़िया और उत्तम समय माना जाता है।


 
इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं ज्योतिष/ पंचांग/प्रवचनों/ धार्मिक आस्था और  मान्यताओं पर आधारित हैं | इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है

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